अपडेट: 1 घंटे पहले
6 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) की घोषणा की। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को हटाते हुए ड्यूटी घटाकर 18 प्रतिशत कर दी है। इससे पहले अगस्त 2025 में भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए थे।

यह समझौता न केवल व्यापारिक रिश्तों को राहत देता है, बल्कि ऊर्जा, विमानन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देता है।
📉 भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ में कटौती

अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगाया गया 25% का दंडात्मक टैरिफ हटाकर उसे 18% कर दिया है। इससे भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों—जैसे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग—को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग जगत ने इसे निर्यात बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
🌾🍷 अमेरिकी उत्पादों पर भारत की रियायतें
इस समझौते के तहत भारत ने भी अमेरिका को कुछ रियायतें दी हैं। भारत अब अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा, जिनमें शामिल हैं:
- सोयाबीन तेल
- वाइन
- ट्री नट्स (बादाम, अखरोट आदि)
इससे अमेरिकी किसानों और खाद्य उद्योग को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
🔋✈️💻 $500 अरब डॉलर की बड़ी खरीद का वादा

भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह खरीद मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में होगी:
- ऊर्जा (LNG और अन्य स्रोत)
- विमान और विमानन तकनीक
- एडवांस टेक्नोलॉजी और डिफेंस-संबंधित सिस्टम
इस कदम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
🛢️ रूसी तेल पर दबाव और भारत की रणनीति

यह समझौता ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका भारत पर रूसी तेल आयात कम करने का दबाव बना रहा था। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 1.16–1.22 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो दर्शाता है कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता (Diversification) लाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
⚖️ आलोचना और असंतुलन के आरोप

हालांकि सरकार इसे एक रणनीतिक जीत बता रही है, लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों और विपक्षी विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता असमान (Asymmetric) है और इससे अमेरिका को अधिक फायदा मिलता दिख रहा है। उनका तर्क है कि:
- भारत ने आयात और खरीद में बड़े वादे किए
- जबकि अमेरिका ने केवल आंशिक टैरिफ राहत दी
फिर भी, सरकार का कहना है कि यह पूर्ण व्यापार समझौते (Full Trade Agreement) की दिशा में एक जरूरी कदम है।
🔮 आगे क्या?
यह अंतरिम समझौता दोनों देशों के बीच भविष्य में होने वाले व्यापक व्यापार समझौते की नींव रखता है। आने वाले महीनों में टैरिफ, डिजिटल ट्रेड, डिफेंस और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।
📝 निष्कर्ष

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक संतुलन के बीच एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जहां इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलती है, वहीं यह भारत की ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों को भी मजबूती देता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह अंतरिम समझौता जल्द ही एक संतुलित और दीर्घकालिक व्यापार समझौते में बदल पाएगा।
